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रामचरितमानस

लंकाकाण्ड

लंकाकाण्ड

जाम्बवन्त के आदेश से नल-नील दोनों भाइयों ने वानर सेना की सहायता से समुद्र पर पुल बांध दिया। श्री राम ने श्री रामेश्वर की स्थापना करके भगवान शंकर की पूजा की और सेना सहित समुद्र के पार उतर गये। समुद्र के पार जाकर राम ने डेरा डाला। पुल बंध जाने और राम के समुद्र के पार उतर जाने के समाचार से रावण मन में अत्यंत व्याकुल हुआ। मन्दोदरी के राम से बैर न लेने के लिये समझाने पर भी रावण का अहंकार नहीं गया। इधर राम अपनी वानरसेना के साथ सुबेल पर्वत पर निवास करने लगे। अंगद राम के दूत बन कर लंका में रावण के पास गये और उसे राम के शरण में आने का संदेश दिया किन्तु रावण ने नहीं माना। शांति के सारे प्रयास असफल हो जाने पर युद्ध आरम्भ हो गया।

लक्ष्मण और मेघनाद के मध्य घोर युद्ध हुआ। शक्तिबाण के वार से लक्ष्मण मूर्क्षित हो गये। उनके उपचार के लिये हनुमान सुषेण वैद्य को ले आये और संजीवनी लाने के लिये चले गये। गुप्तचर से समाचार मिलने पर रावण ने हनुमान के कार्य में बाधा के लिये कालनेमि को भेजा जिसका हनुमान ने वध कर दिया। औषधि की पहचान न होने के कारण हनुमान पूरे पर्वत को ही उठा कर वापस चले। मार्ग में हनुमान को राक्षस होने के सन्देह में भरत ने बाण मार कर मूर्क्षित कर दिया परन्तु यथार्थ जानने पर अपने बाण पर बिठा कर वापस लंका भेज दिया। इधर औषधि आने में विलम्ब देख कर राम प्रलाप करने लगे। सही समय पर हनुमान औषधि लेकर आ गये और सुषेण के उपचार से लक्ष्मण स्वस्थ हो गये।

 रावण ने युद्ध के लिये कुम्भकर्ण को जगाया। कुम्भकर्ण ने भी राम के शरण में जाने की असफल मन्त्रणा दी। युद्ध में कुम्भकर्ण ने राम के हाथों परमगति प्राप्त की। लक्ष्मण ने मेघनाद से युद्ध करके उसका वध कर दिया। राम और रावण के मध्य अनेकों घोर युद्ध हुये और अन्त में रावण राम के हाथों मारा गया। विभीषण को लंका का राज्य सौंप कर राम सीता और लक्ष्मण के साथ पुष्पकविमान पर चढ़ कर अयोध्या के लिये प्रस्थान किया।

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नीचे लंकाकाण्ड से जुड़े घटनाक्रमों की विषय सूची दी गई है। आप जिस भी घटना के बारे में पढ़ना चाहते हैं उसकी लिंक पर क्लिक करें।

*** मंगलाचरण

*** नल-नील द्वारा पुल बाँधना, श्री रामजी द्वारा श्री रामेश्वर की स्थापना


*** श्री रामजी का सेना सहित समुद्र पार उतरना, सुबेल पर्वत पर निवास, रावण की व्याकुलता

*** रावण को मन्दोदरी का समझाना, रावण-प्रहस्त संवाद


*** सुबेल पर श्री रामजी की झाँकी और चंद्रोदय वर्णन

*** श्री रामजी के बाण से रावण के मुकुट-छत्रादि का गिरना

*** मन्दोदरी का फिर रावण को समझाना और श्री राम की महिमा कहना


*** अंगदजी का लंका जाना और रावण की सभा में अंगद-रावण संवाद

*** रावण को पुनः मन्दोदरी का समझाना

*** अंगद-राम संवाद, युद्ध की तैयारी

*** युद्धारम्भ

*** माल्यवान का रावण को समझाना


*** लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, लक्ष्मणजी को शक्ति लगना

*** हनुमानजी का सुषेण वैद्य को लाना एवं संजीवनी के लिए जाना, कालनेमि-रावण संवाद, मकरी उद्धार, कालनेमि उद्धार

*** भरतजी के बाण से हनुमान्‌ का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्‌ संवाद


*** श्री रामजी की प्रलापलीला, हनुमान्‌जी का लौटना, लक्ष्मणजी का उठ बैठना

*** रावण का कुम्भकर्ण को जगाना, कुम्भकर्ण का रावण को उपदेश और विभीषण-कुम्भकर्ण संवाद

*** कुम्भकर्ण युद्ध और उसकी परमगति


*** मेघनाद का युद्ध, रामजी का लीला से नागपाश में बँधना

*** मेघनाद यज्ञ विध्वंस, युद्ध और मेघनाद उद्धार


*** रावण का युद्ध के लिए प्रस्थान और श्री रामजी का विजयरथ तथा वानर-राक्षसों का युद्ध

*** लक्ष्मण-रावण युद्ध


*** रावण मूर्च्छा, रावण यज्ञ विध्वंस, राम-रावण युद्ध

*** इंद्र का श्री रामजी के लिए रथ भेजना, राम-रावण युद्ध


*** रावण का विभीषण पर शक्ति छोड़ना, रामजी का शक्ति को अपने ऊपर लेना, विभीषण-रावण युद्ध

*** रावण-हनुमान्‌ युद्ध, रावण का माया रचना, रामजी द्वारा माया नाश

*** घोरयुद्ध, रावण की मूर्च्छा


*** त्रिजटा-सीता संवाद

*** रावण का मूर्च्छा टूटना, राम-रावण युद्ध, रावण वध, सर्वत्र जयध्वनि


*** मन्दोदरी-विलाप, रावण की अन्त्येष्टि क्रिया

*** विभीषण का राज्याभिषेक

*** हनुमान्‌जी का सीताजी को कुशल सुनाना, सीताजी का आगमन और अग्नि परीक्षा


*** देवताओं की स्तुति, इंद्र की अमृत वर्षा

*** विभीषण की प्रार्थना, श्री रामजी के द्वारा भरतजी की प्रेमदशा का वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचने का अनुरोध

*** विभीषण का वस्त्राभूषण बरसाना और वानर-भालुओं का उन्हें पहनना

*** पुष्पक विमान पर चढ़कर श्री सीता-रामजी का अवध के लिए प्रस्थान, श्री रामचरित्र की महिमा
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