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अयोध्याकाण्ड पीडीएफ फाइलें--  सम्पूर्ण अयोध्याकाण्ड
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रामचरित्‌मानस

अयोध्याकाण्ड

अयोध्याकांड

राम के विवाह के कुछ समय पश्चात् राजा दशरथ ने राम का राज्याभिषेक करना चाहा। इस पर देवता लोगों को चिंता हुई कि राम को राज्य मिल जाने पर रावण का वध असम्भव हो जायेगा। व्याकुल होकर उन्होंने देवी सरस्वती से किसी प्रकार के उपाय करने की प्रार्थना की। सरस्वती नें मन्थरा, जो कि कैकेयी की दासी थी, की बुद्धि को फेर दिया। मन्थरा की सलाह से कैकेयी कोपभवन में चली गई।

दशरथ जब मनाने आये तो कैकेयी ने उनसे वरदान मांगे कि भरत को राजा बनाया जाये और राम को चौदह वर्षों के लिये वनवास में भेज दिया जाये। राम के साथ सीता और लक्ष्मण भी वन चले गये। ऋंगवेरपुर में निषादराज गुह ने तीनों की बहुत सेवा की। कुछ आनाकानी करने के बाद केवट ने तीनों को गंगा नदी के पार उतारा|

प्रयाग पहुँच कर राम ने भरद्वाज मुनि से भेंट की। वहाँ से राम यमुना स्नान करते हुये वाल्मीकि ऋषि के आश्रम पहुँचे। वाल्मीकि से हुई मन्त्रणा के अनुसार राम, सीता और लक्ष्मण चित्रकूट में निवास करने लगे। अयोध्या में पुत्र के वियोग के कारण दशरथ का स्वर्गवास हो गया। वशिष्ठ ने भरत और शत्रुघ्न को उनके ननिहाल से बुलवा लिया। वापस आने पर भरत ने अपनी माता कैकेयी की, उसकी कुटिलता के लिये, बहुत भर्तस्ना की और गुरुजनों के आज्ञानुसार दशरथ की अन्त्येष्टि क्रिया की। भरत ने अयोध्या के राज्य को अस्वीकार कर दिया और राम को मना कर वापस लाने के लिये समस्त स्नेहीजनों के साथ चित्रकूट चले गये| कैकेयी को भी अपने किये पर अत्यंत पश्चाताप हुआ।

 सीता के माता-पिता सुनयना एवं जनक भी चित्रकूट पहुँचे। भरत तथा अन्य सभी लोगों ने राम के वापस अयोध्या जाकर राज्य करने का प्रस्ताव रखा जिसे कि राम ने, पिता की आज्ञा पालन करने और रघुवंश की रीति निभाने के लिये, अमान्य कर दिया। भरत अपने स्नेही जनों के साथ राम की पादुका को साथ लेकर वापस अयोध्या आ गये। उन्होंने राम की पादुका को राज सिंहासन पर विराजित कर दिया स्वयं नन्दिग्राम में निवास करने लगे।  नीचे अयोध्याकांड से जुड़े घटनाक्रमों की विषय सूची दी गई है।

valmiki

रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि

 
अयोध्याकांड में-

• मंगलाचरण

• राम राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की व्याकुलता तथा सरस्वती से उनकी प्रार्थना

• सरस्वती का मन्थरा की बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा संवाद, प्रजा में खुशी

• कैकेयी का कोपभवन में जाना

• दशरथ-कैकेयी संवाद और दशरथ शोक, सुमन्त्र का महल में जाना और वहाँ से लौटकर श्री रामजी को महल में भेजना

•श्री राम-कैकेयी संवाद

• श्री राम-दशरथ संवाद, अवधवासियों का विषाद, कैकेयी को समझाना

• श्री राम-कौसल्या संवाद

• श्री सीता-राम संवाद

• श्री राम-कौसल्या-सीता संवाद

• श्री राम-लक्ष्मण संवाद

• श्री लक्ष्मण-सुमित्रा संवाद

• श्री रामजी, लक्ष्मणजी, सीताजी का महाराज दशरथ के पास विदा माँगने जाना, दशरथजी का सीताजी को समझाना

• श्री राम-सीता-लक्ष्मण का वन गमन और नगर निवासियों को सोए छोड़कर आगे बढ़ना

• श्री राम का श्रृंगवेरपुर पहुँचना, निषाद के द्वारा सेवा

• लक्ष्मण-निषाद संवाद, श्री राम-सीता से सुमन्त्र का संवाद, सुमंत्र का लौटना

• केवट का प्रेम और गंगा पार जाना

• प्रयाग पहुँचना, भरद्वाज संवाद, यमुनातीर निवासियों का प्रेम

• तापस प्रकरण

• यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम

• श्री राम-वाल्मीकि संवाद

• चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों के द्वारा सेवा

• सुमन्त्र का अयोध्या को लौटना और सर्वत्र शोक देखना

• दशरथ-सुमन्त्र संवाद, दशरथ मरण

• मुनि वशिष्ठ का भरतजी को बुलाने के लिए दूत भेजना

• श्री भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक

• भरत-कौसल्या संवाद और दशरथजी की अन्त्येष्टि क्रिया

• वशिष्ठ-भरत संवाद, श्री रामजी को लाने के लिए चित्रकूट जाने की तैयारी

• अयोध्यावासियों सहित श्री भरत-शत्रुघ्न आदि का वनगमन

• निषाद की शंका और सावधानी

• भरत-निषाद मिलन और संवाद और भरतजी का तथा नगरवासियों का प्रेम

• भरतजी का प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज संवाद

• भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार

• इंद्र-बृहस्पति संवाद

• भरतजी चित्रकूट के मार्ग में

• श्री सीताजी का स्वप्न, श्री रामजी को कोल-किरातों द्वारा भरतजी के आगमन की सूचना, रामजी का शोक, लक्ष्मणजी का क्रोध

• श्री रामजी का लक्ष्मणजी को समझाना एवं भरतजी की महिमा कहना

• भरतजी का मन्दाकिनी स्नान, चित्रकूट में पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिता का शोक और श्राद्ध

• वनवासियों द्वारा भरतजी की मंडली का सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप

• श्री वशिष्ठजी का भाषण

• श्री राम-भरतादि का संवाद

• जनकजी का पहुँचना, कोल किरातादि की भेंट, सबका परस्पर मिलाप

• कौसल्या सुनयना-संवाद, श्री सीताजी का शील

• जनक-सुनयना संवाद, भरतजी की महिमा

• जनक-वशिष्ठादि संवाद, इंद्र की चिंता, सरस्वती का इंद्र को समझाना

• श्री राम-भरत संवाद

• भरतजी का तीर्थ जल स्थापन तथा चित्रकूट भ्रमण

• श्री राम-भरत-संवाद, पादुका प्रदान, भरतजी की बिदाई

• भरतजी का अयोध्या लौटना, भरतजी द्वारा पादुका की स्थापना, नन्दिग्राम में निवास और श्री भरतजी के चरित्र श्रवण की महिमा   अगला पेज...

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